सनातन गुरुकुल –
सनातन गुरुकुल भारतीय संस्कृति और वैदिक जीवन-मूल्यों पर आधारित एक नि:शुल्क शिक्षण प्रणाली है, जहाँ प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय किया जाता है। यहाँ शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने का माध्यम है। वेद, उपनिषद, योग, ध्यान और आयुर्वेदिक जीवनशैली के साथ-साथ आधुनिक विषयों को इस प्रकार जोड़ा गया है कि विद्यार्थी का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास एक साथ हो सके। सनातन गुरुकुल एक ऐसी शिक्षण भूमि है, जहाँ ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन-दृष्टि का निर्माण होता है, जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वासी, संतुलित और समाजोपयोगी बनता है। → और पढ़ें…
उद्देश्य एवं विशेषताएँ
• सनातन व्यवस्था – जीवन को साधना, शिक्षा को चरित्र-निर्माण की दिशा
• वैदिक + आधुनिक समन्वय – परंपरा और प्रगति का संतुलित मेल
• चरित्र व संस्कार निर्माण – नैतिकता, अनुशासन और जीवन-मूल्य विकास
• पाँच आयामों का संतुलन – शारीरिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक व आर्थिक विकास
• आत्मनिर्भर व्यक्तित्व – कौशल, विवेक और आत्मविश्वास का निर्माण
• समाज व राष्ट्रबोध – सेवा-भाव और उत्तरदायी नागरिकता
• जीवन-निर्माण की शिक्षा – जानकारी नहीं, सही दिशा देने वाली शिक्षा
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सनातन गुरुकुल क्यों?
• क्योंकि संस्कार के बिना ज्ञान अधूरा होता है
• वैदिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का संतुलन आवश्यक है
• चरित्र, अनुशासन और नैतिकता का पुनर्निर्माण जरूरी है
• विद्यार्थी का समग्र विकास (शरीर–मन–बुद्धि–आत्मा) आवश्यक है
• आत्मनिर्भर और सक्षम पीढ़ी का निर्माण आवश्यक है
• व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाना है
• शिक्षा केवल नौकरी नहीं, जीवन-निर्माण का माध्यम है
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सनातन गुरुकुल
संस्कार, शिक्षा और जीवन निर्माण
सशक्त व्यक्ति, सशक्त परिवार और सशक्त राष्ट्र के निर्माण हेतु यह एक सनातन जागरण अभियान है, जो जीवन के सभी आयामों को संतुलित शिक्षा से जोड़ता है।
हमारे नि:शुल्क पाठ्यक्रम
- शारीरिक स्वास्थ्य आयाम – योग, दिनचर्या, पोषण, स्वास्थ्य संरक्षण एवं आयुर्वेद
- मानसिक व बौद्धिक आयाम – भाषा, गणित, सामान्य ज्ञान, विज्ञान, ज्योतिष / खगोल
- नैतिक, सांस्कृतिक व सामाजिक आयाम – संस्कार, इतिहास, नीति / विधि, पर्यावरण, कला
- आध्यात्मिक आयाम – सनातन ग्रंथ ज्ञान, दर्शन, स्वर-विज्ञान, अष्टांगयोग, वैदिक संस्कार प्रणाली
- आर्थिक समृद्धि आयाम – अर्थव्यवस्था प्रबंधन, स्वरोजगार, लघु उद्यम, पशुपालन एवं प्राकृतिक खेती
सनातन गुरुकुल के विशेष अभियान
🏡 घर–घर गुरुकुल अभियान
यह अभियान माता–पिता को विद्यार्थी का प्रथम गुरु मानते हुए परिवार को शिक्षा की मूल इकाई बनाता है। इसके माध्यम से वैदिक संस्कार, अनुशासन और आधुनिक ज्ञान का संतुलित मार्गदर्शन प्रत्येक घर तक पहुँचाया जाता है।
उद्देश्य है — हर घर तक नि:शुल्क ज्ञान और जीवन-निर्माण का केंद्र बनाना।
🧑🏫 शिक्षक एवं स्वास्थ्य मित्र निर्माण प्रशिक्षण
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्कारयुक्त शिक्षकों एवं जागरूक स्वास्थ्य मित्रों का निर्माण करता है, जो शिक्षा, नैतिकता और स्वास्थ्य-सचेत जीवनशैली के माध्यम से परिवार और समाज को सही दिशा दे सकें।
उद्देश्य है — ज्ञान, सेवा और स्वास्थ्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले मार्गदर्शक तैयार करना।
🪔 सनातन व्यवस्था अभियान
प्रत्येक रविवार - समय परिस्थिति अनुसार
सनातन व्यवस्था ईश्वर, प्रकृति और जीव — इन तीनों के संतुलन पर आधारित एक शाश्वत जीवन-पद्धति है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति से समाज तक कल्याण है। सनातन परिवार इसका मूल आधार है।
इस साप्ताहिक परिचर्चा में सनातन परिवार और व्यवस्था क्या है और क्यों आवश्यक है पर सरल एवं संवादात्मक चर्चा की जाती है।
सनातन परिवार के निर्माण हेतु साप्ताहिक गतिविधियाँ
📿 साप्ताहिक सुन्दरकाण्ड
भक्ति से बल, बुद्धि और कृपा
सनातन परिवार में साप्ताहिक सामूहिक सुन्दरकाण्ड पाठ श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक चेतना के भाव के साथ किया जाता है। यह पाठ मानसिक शांति, आत्मबल और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
इस साप्ताहिक अभियान में बच्चे, युवा, स्त्री-पुरुष एवं बुजुर्ग सभी श्रद्धापूर्वक सहभागी बन सकते हैं।
🧘♂️ योग–प्राणायाम
प्राण में संतुलन, जीवन में शांति
सनातन परिवार द्वारा शरीर, मन और आत्मा के संतुलन हेतु योग–प्राणायाम में सूर्य नमस्कार, योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का नियमित अभ्यास कराया जाता है।
योग–प्राणायाम से शरीर स्वस्थ, मन शांत और जीवन संतुलित होता है, साथ ही एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है।
🔥 साप्ताहिक सामूहिक यज्ञ
यज्ञ से शुद्धि, यज्ञ से शक्ति
सनातन परिवार में साप्ताहिक सामूहिक यज्ञ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं आहुति के साथ सम्पन्न किया जाता है। यज्ञ वातावरण की शुद्धि, मानसिक शांति और सामूहिक कल्याण का प्रभावशाली माध्यम है।
इसमें परिवार, युवा, स्त्री-पुरुष एवं बुजुर्ग सभी श्रद्धा और संकल्प के साथ सहभागी बन सकते हैं।
कुण्डीय विराट महायज्ञ
🔥 सनातन पुनर्जागरण महायज्ञ – 11000 कुण्डीय यज्ञ
भारतीय नववर्ष (नवसंवत्सर) | 19 मार्च 2026
भारतीय नवसंवत्सर के पावन अवसर पर सनातन व्यवस्था की पुनः स्थापना, राष्ट्र जागरण एवं विश्व कल्याण के महत उद्देश्य से सनातन पुनर्जागरण महायज्ञ के अंतर्गत 11000 कुण्डीय विराट यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यह महायज्ञ किसी एक स्थान का नहीं, बल्कि परिवार और ग्राम स्तर पर होने वाला सनातन अभियान है। कोई भी परिवार, कोई भी ग्राम आयोजक बन सकता है।
नववर्ष के पावन अवसर पर 11000 स्थानों पर एक साथ सम्पन्न होने वाला यह यज्ञ जन–जन तक सनातन चेतना पहुँचाने का संकल्प है।
सनातन गुरुकुल की गतिविधियाँ और संचालित नि:शुल्क कक्षाएं






















🌿 विशेष निवेदन
सनातन व्यवस्था ईश्वर, प्रकृति और जीव—इन तीनों के संतुलन पर आधारित
एक शाश्वत जीवन-पद्धति है। यह व्यवस्था व्यक्ति के चरित्र निर्माण से प्रारम्भ होकर
परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र कल्याण तक मार्ग प्रशस्त करती है।
इसमें जीवन के प्रत्येक पक्ष—आचार, विचार, व्यवहार, शिक्षा, स्वास्थ्य और
सामाजिक उत्तरदायित्व—को संतुलित एवं मर्यादित रूप में जीने की प्रेरणा दी जाती है।
सनातन परिवार इसका मूल आधार है, जहाँ संस्कार, सेवा और सहयोग से
सशक्त व्यक्ति, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।
सनातन व्यवस्था तभी जीवित और प्रभावी रहती है,
जब वह परिवारों के व्यवहार में उतरकर
पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़े।
आज आवश्यकता है कि हम स्वयं सनातन परिवार बनें
और इस चेतना को समाज तक पहुँचाएँ।
यह केवल किसी संस्था से जुड़ना नहीं,
बल्कि संस्कार, सेवा और संकल्प के साथ
घर-घर सनातन जागरण का सहभागी बनने का अवसर है।
आपका एक कदम अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
🌿 विशेष निवेदन
सनातन व्यवस्था ईश्वर, प्रकृति और जीव—इन तीनों के संतुलन पर आधारित एक शाश्वत जीवन-पद्धति है। यह व्यवस्था व्यक्ति के चरित्र निर्माण से प्रारम्भ होकर परिवार, समाज और राष्ट्र के समग्र कल्याण तक मार्ग प्रशस्त करती है। इसमें जीवन के प्रत्येक पक्ष—आचार, विचार, व्यवहार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व—को संतुलित एवं मर्यादित रूप में जीने की प्रेरणा दी जाती है।
सनातन परिवार इसका मूल आधार है, जहाँ संस्कार, सेवा और सहयोग से सशक्त व्यक्ति, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।
सनातन व्यवस्था तभी जीवित और प्रभावी रहती है, जब वह परिवारों के व्यवहार में उतरकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़े। आज आवश्यकता है कि हम स्वयं सनातन परिवार बनें और इस चेतना को समाज तक पहुँचाएँ।
यह केवल किसी संस्था से जुड़ना नहीं,
बल्कि संस्कार, सेवा और संकल्प के साथ
घर-घर सनातन जागरण का सहभागी बनने का अवसर है।
आपका एक कदम अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
