🌾 गौ-आधारित प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती, गौपालन, पंचगव्य, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम स्वावलंबन पर आधारित समग्र एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण। इसका उद्देश्य प्रकृति-सम्मत, रसायन-मुक्त एवं आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था का विकास करना तथा स्वस्थ समाज एवं समृद्ध ग्राम निर्माण की दिशा में सक्षम कृषकों का निर्माण करना है।
🌱 प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त खेती की वैज्ञानिक तथा व्यवहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण।
🐄 गौपालन
देशी गौवंश का संरक्षण, पालन एवं कृषि आधारित जीवन में उसका समन्वित उपयोग।
🥣 पंचगव्य एवं जैविक कृषि
पंचगव्य, जैविक उर्वरक एवं प्राकृतिक कृषि संसाधनों का व्यवहारिक उपयोग।
🌍 ग्राम स्वावलंबन
पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि एवं आत्मनिर्भर ग्राम व्यवस्था का विकास।
📚 इस पाठ्यक्रम में क्या सीखेंगे?
- प्राकृतिक खेती – रसायन-मुक्त एवं प्रकृति आधारित कृषि की आधुनिक एवं पारंपरिक विधियाँ।
- गौपालन – देशी गाय का संरक्षण, पालन एवं कृषि में उसका उपयोग।
- पंचगव्य – पंचगव्य आधारित उर्वरक, जैविक घोल एवं प्राकृतिक कृषि तकनीक।
- जैविक कृषि – मिट्टी की उर्वरता, प्राकृतिक पोषण एवं टिकाऊ खेती की प्रणाली।
- पर्यावरण संरक्षण – जल, भूमि, जैव विविधता एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
- ग्राम स्वावलंबन – कृषि आधारित आत्मनिर्भर ग्राम एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास।
🎯 पाठ्यक्रम का उद्देश्य
प्राकृतिक कृषि, गौ-आधारित जीवनशैली एवं ग्राम स्वावलंबन को बढ़ावा देकर ऐसे जागरूक एवं आत्मनिर्भर कृषकों का निर्माण करना जो पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ कृषि एवं ग्रामीण विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।
👥 यह पाठ्यक्रम किनके लिए है?
- किसान एवं कृषि से जुड़े युवा
- प्राकृतिक एवं जैविक खेती सीखने के इच्छुक व्यक्ति
- गौपालन में रुचि रखने वाले नागरिक
- ग्रामीण उद्यमी एवं स्वावलंबी किसान
- पर्यावरण संरक्षण के कार्यकर्ता
- ग्राम विकास एवं आत्मनिर्भर भारत के समर्थक
📌 प्रवेश हेतु संबंधित पंजीकरण करें।
